Saturday, 26 November 2016

जय जय राजस्थान

धरती की शान राजस्थान
जलम हुयो जठै म्हारो, धरती राजस्थान री।
 चारण कवि खूब सुणावै, गाथा राजस्थान री।।

ऊँचा-ऊँचा धोरा अठै, लाम्बो रेगिस्तान।
कोसां कोस रुंख कोनी, तपतो राजस्थान।।
 फोगला अर कैर अठै, करै भौम पर राज।
गोडावण रा जोङा अठै, मरुधर रा ताज।।

कुंवा रो खारो पाणी, पीवै भैत मिनख।
मेह रो पालर पाणी, ब्होत जुगत सूं रख।।

कोरी कोरी टीबङी, उङै रेत असमान।
सणसणाट यूं बाज रही, जणुं सरगम रा गीत।।
सोनै ज्यूं चमके रेत, चाँदनी रातां में।
रेत री महिमा गावै, चारण आपरी बातां में।।

इटकण मिटकण दही चटोकण, खेलै बाल गोपाल अठै।
गुल्ली डंडा खेल प्यारा, कुरां कुरां और कठै।।

अरावली रा डोंगर ऊंचा, आबू शान मेवाङ री।
चम्बल घाटी तिस मिटावै, माही जान मारवाङ री।।
हवेलियाँ निरखो शेखावाटी री, जयपुर में हवामहल।
चित्तौङ रा दुर्ग निरखो, डीग रा निरखो जलमहल।।

संगमरमर बखान करै, भौम री सांची बात।
ऊजळै देश री ऊजळी माटी, परखी जांची बात।।

धोरा देखो थार रा, कोर निकळी धोरां री।
रेत चालै पाणी ज्यूं,
पून चालै जोरां री।।
भूली चूकी मेह होवै, बाजरा ग्वार उपजावै।
मोठ मूँग पल्लै पङे तो, सगळा कांख बजावै।।

पुष्कर रो जग में नाम, मेहन्दीपुर भी नाम कमावै।
अजमेर आवै सगळा धर्मी, रुणेचा जातरु पैदल जावै।।

रोहिङै रा फूल भावै, रोहिङो खेतां री शान।
खेजङी सूँ याद आवै, अमृता बाई रो बलिदान।।


सोने री धरती अठै, चांदी रो असमान।
रंग रंगीलो रस भरियो, ओ म्हारो राजस्थान।।

रंग-रंगीलो राजस्थान, नाज करै है देस।
न्यारी-न्यारी बोली अठैगी, न्यारा-न्यारा भेस।।

राणा जेङो वीर अठै, राजस्थान री शान।
जयपुर जेङो नगर अठै, सैलानियां री जान।।
अरावली पर्वत ऊंचा घणा, कांई म्हे करां बखान।
राजकनाळ लाम्बी घणी, मरुधर रो वरदान।।

चेतक तुरंग हठीलो घणो, भामाशाह महादानी।
सांगा हिन्दू लाज बचावणा, जौहर पद्मण रानी।।

ढोला मरवण प्रेम कहाणी, गावै कवि( शेरदान)।
आल्हा ऊदल वीर कहाणी, चारण कवि करै बखान।।
 जैपुर कोटा अर् बीकाणा, जग में मान बढावै।      उदैपुर जोधाणा भी, राजस्थान री शान कहावै।।

गोगामेङी गोगो धुकै, रुणेचा रामदेव जी।
सालासर हनुमानजी बैठ्या, कोळू पाबूदेव जी।।

पल्लु में काळका माता, देशनोक में माँ करणी।
सुन्धा परबत री सुन्धा माता, तीनूं लोक दुख हरणी।।
 राठी गौ री शान प्यारी, बैल नागौरी चोखा घणा।
ऊंट री एक जाणी, बीकाणै में जो नाचणा।।

घूमर घालै गोरियां, माणस बजावै चंग।
होळी खेलै देवर भाभी, उङै कसूमल रंग।।



जयपुर में गणगौर सवारी, राजसी ठाठ दिखावै।
दशहरो मेळो कोटा रो, धरमी मान बढावै।।

साफा अठै जोधपुर रा, परदेशां कीर्ति बखाणै।
मोचङी भी न्यारी-न्यारी, देशोदेश जाणै।
             Jai jai Rajasthan 

Monday, 21 November 2016

Charbhuja jaljhulani.



Charbhuja :-.

चारभुजा गढ़बोर का मन्दिर अपने आप में बहुत ही प्रसिद्ध मंदिर है और मेवाड के चार धाम में से एक माना जाता है । यहां की जलझुलनी एकादशी बहुत ही प्रसिद्ध है ।



महाराष्ट्र, गुजराज व राजस्थान के कई स्थानों से लोग इस दिन यहां दर्शनों का लाभ लेने हेतू यहां आते हैं ।



राजसमंद के गांवो जेसे रीछेड, सांयो का खेडा एवं चारभुजा आदि स्थानो से कई कई लोग जो रोजगार ना या कम होने के कारण बाहर बडे शहरों की ओर पलायन कर गए, उनमें से भी वे लोग साल में इस दिन परिवार सहित यहां अपने गांव में आने को लालायित रहते हैं ।



चारभुजा जी को मंदिर से पालकी, सवारी व गाजे बाजे के साथ, रंग गुलाल उडाते और गीत गाते हजारों की संख्या में लोग तालाब के किनारे स्थित खास स्थल पर ले कर जाते हैं जहां विधिवत स्नान व पूजा अर्चना आदि की जाती है ।



इस दिन चारों ओर उल्लास का माहौल होता है । औरतें गीत भजन आदि गाती हैं और नृत्य करती है और हजारो लोग भगवान चारभुजा की जय जयकार करते हुए एक विशेष तरह की सवारी निकलते हैं ।



एक बार अवश्य भ्रमण करे ।

धन्यवाद

Thursday, 17 November 2016

Parshuram Mahadev Mewar


परशुराम महादेव गुफा मंदिर – मेवाड़ का अमरनाथ – स्वंय परशुराम ने फरसे से चट्टान को काटकर किया था निर्माण :-


अरावली की सुरम्य पहाड़ियों में स्तिथ परशुराम महादेव गुफा मंदिर का निर्माण स्वंय परशुराम ने अपने फरसे से चट्टान को काटकर किया था। इस गुफा मंदिर तक जाने के लिए 500 सीढ़ियों का सफर तय करना पड़ता है।



इस गुफा मंदिर के अंदर एक स्वयं भू शिवलिंग है जहां पर विष्णु के छठे अवतार परशुराम ने भगवान शिव की कई वर्षो तक कठोर तपस्या की थी। तपस्या के बल पर उन्होंने भगवान शिव से धनुष, अक्षय तूणीर एवं दिव्य फरसा प्राप्त किया था।



हैरतअंगेज वाली बात यह है कि पूरी गुफा एक ही चट्टान में बनी हुई है। ऊपर का स्वरूप गाय के थन जैसा है। प्राकृतिक स्वयं-भू लिंग के ठीक ऊपर गोमुख बना है, जिससे शिवलिंग पर अविरल प्राकृतिक जलाभिषेक हो रहा है।



मान्यता है कि मुख्य शिवलिंग के नीचे बनी धूणी पर कभी भगवान परशुराम ने शिव की कठोर तपस्या की थी। इसी गुफा में एक शिला पर एक राक्षस की आकृति बनी हुई है। जिसे परशुराम ने अपने फरसे से मारा था।



दुर्गम पहाड़ी, घुमावदार रास्ते, प्राकृतिक शिवलिंग, कल-कल करते झरने एवं प्राकृतिक सौंदर्य से ओत-प्रोत होने के कारण भक्तों ने इसे मेवाड़ के अमरनाथ का नाम दे दिया है।



परशुराम महादेव का मंदिर राजस्थान के राजसमन्द और पाली जिले की सीमा पर स्तिथ है। मुख्य गुफा मंदिर राजसमन्द जिले में आता है जबकि कुण्ड धाम पाली जिले में आता है। पाली से इसकी दुरी करीब 100 किलोमीटर और विशव प्रसिद्ध kumbhal garh fort से मात्र 10 किलोमीटर है।



इसकी समुद्र ताल से उचाई 3600 फ़ीट है। यहाँ से कुछ दूर सादड़ी क्षेत्र में परशुराम महादेव की बगीची है। गुफा मंदिर से कुछ ही मील दूर मातृकुंडिया नामक स्थान है जहां परशुराम को मातृहत्या के पाप से मुक्ति मिली थी ।



इसके अलावा यहां से 100 किमी दूर पर परशुराम के पिता महर्षि जमदगनी की तपोभूमि है।



Jai Rajputana



Bannasa at Parshuram mahadev



Yadgar tour visit & enjoy

Thanks

Kumbhal garh fort

आपने ” The Great Wall Of China ” के बारे में तो सुना ही होगा जो कि विशव कि सबसे बड़ी दीवार है पर क्या आपने विशव कि दूसरी सबसे लम्बी दीवार के बारे में सुना है जो कि भारत में स्थित है? यह है राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित कुम्भलगढ़ फोर्ट कि दीवार जो कि 36 किलोमीटर लम्बी तथा 15 फीट चौड़ी है।



इस फोर्ट का निर्माण महाराणा कुम्भा ने करवाया था। यह दुर्ग समुद्रतल से करीब 1100 मीटर कि ऊचाईं पर स्थित है। इसका निर्माण सम्राट अशोक के दूसरे पुत्र सम्प्रति के बनाए दुर्ग के अवशेषो पर किया गया था।






इस दुर्ग के पूर्ण निर्माण में 15 साल (1443-1458) लगे थे। दुर्ग का निर्माण पूर्ण होने पर महाराणा कुम्भ ने सिक्के बनवाये थे जिन पर दुर्ग और इसका नाम अंकित था।






Jai Rajputana

Wednesday, 16 November 2016

Kumbhalgarh

जय राजपुताना
Banna at kumbhalgarh fort.

Bannasa from dkk

वीरों की दहाड़ होगी,#राजपूतों की ललकार होगीआ रहा है वक़्त जब फिरक्षत्रियों की भरमार होगी !!



Jai rajputana

Tuesday, 15 November 2016

Banna's attitude

Bannasa of dkk attitude is very high & dangerous so don't comment on bannasa dkk .

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Jai Rajputana .........